अमरनाथ यात्रा से मुडकर चितकुल की ओर
#यात्रा वृतांत
अमरनाथ यात्रा से मुडकर चितकुल की ओर की यादगार एवम अविस्मरणीय यात्रा का वृतांत!! (भारत का अंतिम गांव)...
सन् 2017 से 2019 तक हर साल अमरनाथ महादेव के शरण मै जाने के अथक प्रयासों के बाद भी महादेव के बुलावा के बिना पुरा नही ही हुआ है
लेकिन 2019 मै आशा की किरण नज़र आने लगी, एक दिन सुबहः मित्र आलोक का काल आया यात्रा का रेजिस्ट्रेशन आज से चालू हो रहा है सब तैयारी से ऑफिस आना मेडिकल भी आज ही कराना है इसलिए नास्ता न करना, पूरी फॉर्मल्टी के बाद , साथ ही काफी हाउस मै बैठकर नास्ता करते हुए, आगे का भी प्लानिंग कर लेगे|
आज तो मै सुबहः सबसे पहले ही ऑफिस पहुँच गया था| सुबह का सारा ऑफिशियल प्रोटोकाल फटाफट निपटाया, आलोक का इंतेज़ार ही कर रहा था कि उसका काल ही आ गया कि तुम जम्मू कश्मीर बैंक आ जाओ मै वही पहुँच रहा हूँ, बर्फानी बाबा के दर्शन करने की खुशी में सब काम फटा फट हो रहा था, फार्म लेकर हॉस्पिटल चले गए मेडिकल करवाने के लिए। एक घंटे में दोनों का मेडिकल रिपोर्ट भी मिल गया। हम लोग हवा में उड़ान भरते हुवे वापस बैंक आकर पुरी यात्रा की फार्मलिटी पुरा किये 🆎 हमारे हाथो में यात्रा की तारीख आ गई थी। हम लोग को पहलगाम की ओर से 2 ऑगस्त 2019 को यात्रा चालु करना था। मै बहुत रोमांचित हो रहा था मै पहेली बार जा रहा था आलोक का तीसरा टाइम होने का था
काफी हाउस मै नास्ता करते हुए आलोक बोला तिवारी जी बहुत कठिन यात्रा है परन्तु मज़ेदार रहेगी, आप डेली दस किलोमीटर का प्रैक्टिस चालू कर दो और दो तीन दोस्तो को भी चलने के लिए भी राजी कर लेते हैं ताकि यात्रा मै किसी भी प्रकार के विपत्ति पर सहयोग मिल जायेगा। मैं मंद ही मंद मुस्कराते हुए बोला भाई तुमको मालूम नहीं है कि मै
उतराखंड के चारो धाम की यात्रा कर चुका हूँ वो भी जून 2013 मै तब वँहा जलजला आया था। मेरे साथ माँ, चाची और धर्मपत्नी थी, और मै अकेला ही था 15 दिन की पुरी यात्रा अपने गाड़ी से। तुम चिन्ता न करो, अमरनाथ जरूर पहली बार जा रहा हूँ परंतु मै *मन से घुमक्कड़ ही हूँ* बहुत यात्रा कर चुका हूँ सुनो
गंगटोक और दारजिलिंग
असम और मेघालय
हिमांचल आधा घूम चुका हूँ
साउथ इंडिया लगभग पुरा (अगर मौका मिले तो सभी यात्रा का वृतांत् आप सभी से शेयर करूँगा)
और मजे की बात ये है की सारी यात्रा अपने एक दोस्त के साथ ही किया हू
मतलब दो ही लोग किये है
तुम बेकार मै चिंतित हो
लेकिन अन्तः किसी एक को ले चलने का निर्णय हुआ
आलोक ने सलाह दी जिसके साथ तुम इतनी यात्रा की है उनसे क्यो नहीं पूछते और मै भी कुछ मित्रों से बात करता हूँ
लेकिन हम लोग अपनी यात्रा की एयर टिकट बुक कर लिया, 1 ऑगस्त का
रायपुर से दिल्ली से श्री नगर की।
मेरा मित्र जाने मै असमर्थ था लेकिन आलोक ने हमारे ऑफिस के ही एक अन्य साथी अमिक को साथ चलने के लिए तैयार कर लिया और बाकी सारी तैयारी भी करवा दी
लेकिन दिल्ली से फ्लाईट उसका दूसरा था वो हमसे एक घंटा पहले श्री नगर पहुँच रहा था
आलोक तीसरी बार जा रहा था उसके सलाह से हमारी तैयारी जोर शोर से चल रही थी।
यात्रा मै जाने के 15 दिन पहले एक शाम मेरे बॉस ने काल कर बुलाये और एक अपना मेल दिखाये, पढ़ कर मेरा होश ही उड़ गया
ऑगस्त प्रथम सप्ताह मै बॉम्बे से सभी बड़े अधिकारी आ रहे थे। मेरे यहाँ के सीनियर बोले अब कैसे करोगे तिवारी जी, मेरा तो दिमाग ही काम नहीं करने लगा था सारे सपने अब चूर चूर होते दिख रहे थे
अब कुछ भी अच्छा लगना बंद हो गया था सात दिनों से सारा शहर सुना सुना मेरे साथ दुःखी लगने लगा था अब दो दिन है बचे थे यात्रा चालु करने के लिए, अमिक मेरे पास आकर बोला तिवारी जी टेंसन नही लेने का, HR से बात हो गई है आप तो डेढ़ महीने पहले ही अपना अवकाश अप्रूव् करा लिए थे। तो रुकने की जरूरत नही आप की छुट्टी रद्द नहीं होगी।
ओह अब मुझे लगा दुनिया मै भगवान अभी भी है। तभी आलोक का फोन आया बोला न्यूज़ देखो।
न्यूज़ में हेड लाइन चल रहा था। अमरनाथ यात्रियो को यात्रा नई करने की ऐडवाइज़ारी जारी होने वाली है
हम लोग बोले जय बाबा बर्फानी, अब जो होगा देखा जायेगा
अन्तः वो दिन आ ही गया हम लोग के बीच सब सुबहः 8 बजे एयरपोर्ट मै मिलने का निर्णय हुआ
तीनो दोस्त रायपुर छोड़ने के लिए बैचैन हो रहे थे
अब हमारा प्लेन दिल्ली के लिए उड़ चला था।
क्रमश:
आगे अगले भाग मे...



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